विषय तो सोचने को मजबूर कर रहा है,परिणाम यह निकला कि दौनों की आवश्यकता है।दौनों के बिना हम अधूरे हैं।सच्चा मित्र होता हीवही है जो अपने मित्र की अच्छाई की प्रशषा करे और उसकी बुराई पर पर्दा करते हुए उसे टिप्पणी्
द्वारा,सुझाव द्वारा प्रेम पूर्वक अपना समझकर समझाए।ऐसे मित्र मिलना इतना आसान नहीं है, इसके लिए हमें अपने को परखना होगा। आपको क्या लगता है,आप अपने विचार अवश्य लिखकर भेजे।
Friday, October 2, 2009
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