Thursday, July 2, 2009

मैं


मैं कौन हूँ?मैं जो हूँ सो हूँ।मैं लड़की, माँ, बहन, बेटी, बहू, दुनिया का कोई भी रिश्ता नाता, होते हुए भी मैं वो सब कुछ नहीं हूँ।मेरा नाम,मेरी योग्यता,मेरा पद,रूपरंग,स्वभाव,संस्कार,घर परिवार,पहचान होते हुए भी मेरा कुछ नहीं है।मेरे पास पर्याप्त साधन,स्वास्थ्य,समझ होते हुए भी मैं पूर्ण नहीं हूँ और हो भी कैसे सकती हूँ क्योंकि मैं समुद्र में एक बूँद भी नहीं हूँ। उस बूँद की क्या औकात जो हवा के सम्पर्क में आते ही हवा हो जाती है।यदि बूँद अपने को संजोना चाहती है तो उसे समुद्र की शरण लेनी होगी।यदि समुद्र है तो नदी, नाले, झरने,तालाब सब हैं,बूँदेंहैं,बारिश है।

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