समय को सलाम करना ही पडता है,अन्यथा हमें ही परेशानी होगी। यदि निर्विवाद सुकून भरा जीवन चाहते हैं तो समय के साथ चलना शुरू कर दीजिए।बहुत आराम में रहेंगे। समय बड़ा बलवान है।बड़े बड़े वीर इसके आगे नतमस्तक हो जाते हैं ।कोई विरला ही होता है जो समय को अपने अनुसार बदल पाता है। वह प्रतिभाशाली दुनिया में अपना नाम रोशन करता है। लेकिन इस के लिए अथक प्रयास करना होता है।
jethwani
Thursday, November 27, 2014
Saturday, April 24, 2010
पत्र
आज समाचार पत्र है | Today is a news paper.
कल कूड्रा पत्र था। Yesterday is a waste paper.
कल प्रश्नपत्र है। T0mmarow is a qestion paper.
जीवन उत्तरपत्र है। Life is a answer paper.
Friday, March 12, 2010
Thursday, January 28, 2010
लोरी
लल्ला लल्ला लोरी दूध की कटोरी
दूध में बताशा मुन्नी करे तमाशा
छोटी-छोटी प्यारी सुन्दर परियों जैसी है
किसी की नज़र ना लगे मेरी मुन्नी ऐसी है
शहद से भी मीठी दूध से भी गोरी
चुपके-चुपके चोरी-चोरी चोरी
लल्ला लल्ला लोरी ...
कारी रैना के माथे पे चमके चाँद सी बिंदिया
मुन्नी के छोटे-छोटे नैनों में खेले निंदिया
सपनों का पलना आशाओं की डोरी
चुपके-चुपके चोरी-चोरी चोरी
लल्ला लल्ला लोरी ...
लल्ला लल्ला लोरी दूध की कटोरी
दूध में बताशा जीवन खेल तमाशा
दूध में बताशा मुन्नी करे तमाशा
छोटी-छोटी प्यारी सुन्दर परियों जैसी है
किसी की नज़र ना लगे मेरी मुन्नी ऐसी है
शहद से भी मीठी दूध से भी गोरी
चुपके-चुपके चोरी-चोरी चोरी
लल्ला लल्ला लोरी ...
कारी रैना के माथे पे चमके चाँद सी बिंदिया
मुन्नी के छोटे-छोटे नैनों में खेले निंदिया
सपनों का पलना आशाओं की डोरी
चुपके-चुपके चोरी-चोरी चोरी
लल्ला लल्ला लोरी ...
लल्ला लल्ला लोरी दूध की कटोरी
दूध में बताशा जीवन खेल तमाशा
Saturday, January 23, 2010
दूल्हा
कम नहीं है दूल्हों के अंदाज
शादी का दिन सभी के लिए बेहद अहम होता है। हालांकि, इस दिन के लिए लड़के पहले कंफ्यूजन में रहते थे कि वे क्या पहनें, लेकिन बाजार ने उनकी इस उलझन को दूर कर दिया है और दूल्हों के लिए अब वेस्टर्न और ट्रडिशनल अंदाज में खूब ड्रेसेज उपलब्ध हैं।
शेरवानी का क्रेज
वेडिंग में वियर में सबसे ज्यादा क्रेज फिलहाल शेरवानी का है। ये लगभग हर फैब्रिक और लेटेस्ट डिजाइंस में आपको मिल जाएंगी। सिल्क, जकार्ड, जापानी और इटैलियन फैब्रिक शेरवानियां बेहद पसंद की जा रही हैं। वैसे, शेरवानी की कीमत उस पर हुए वर्क पर डिपेंड करती है। यानी जितना हैवी वर्क होगा, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होगी। शेरवानी पर कुंदन, जरकोजी, स्टोन, मोती व एम्ब्रॉयडरी वर्क खूब चलता है।
शेरवानी पर मशीन से भी एम्ब्रॉयडरी की जाती है, लेकिन डिमांड हैंड वर्क की ज्यादा है। शेरवानी ऑफ वाइट, मरून, ब्लू, गोल्डन, क्रीम, पर्पल जैसे तमाम कलर्स में पसंद की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि इसकी डिमांड विदेश में भी बहुत है। अगर आप डायमंड, गोल्डन या सिल्वर कलर की तार डलवाना चाहते हैं, तो उसका बंदोबस्त भी किया गया है। इनकी कीमत छह हजार रुपये से शुरू होकर एक लाख रुपये तक जाती है।
अंगरखे में शाही दूल्हा
कभी शाही परिवार की पहचान रहा अंगरखा अब दूल्हों की शान बढ़ा रहा है। ये तमाम फैब्रिक्स में बाजार में उपलब्ध हैं। इनकी कीमत इन पर किए गए स्टोन वर्क और एम्ब्रॉयडरी से तय होती है। अंगरखा को धोती और पेंट के साथ भी डाला जा सकता है और ये क्रीम व ऑफ वाइट कलर में ज्यादा पसंद किए जाते हैं। इनकी कीमत चार हजार रुपये से लेकर पचास हजार रुपये तक है।
पुराना नहीं हुआ जोधपुरी का फैशन
जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि यह सूट राजस्थान में खूब चलता है, लेकिन अपने गेटअप के चलते अब ये सूट काफी चलन में है। हालांकि, ये तमाम फैब्रिक्स में आते हैं, लेकिन इनकी डिमांड इटैलियन फैब्रिक में सबसे ज्यादा है। इनकी कीमत इन पर हुए वर्क और फैब्रिक की क्वॉलिटी से होती है। इसकी कीमत करीब तीन हजार रुपये से शुरू होकर करीब 70 हजार रुपये तक है।
मौजूद है ट्रडिशनल ट्रेंड
भले ही क्लोथ मार्किट में तमाम लेटेस्ट डिजाइन आते रहते हों, लेकिन कुर्ता और पजामा आज भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं। फिलहाल, चाइनीज कॉलर और वी कॉलर के कुर्ते पजामे ट्रेंड में हैं। साथ ही, कुर्ते के गले पर हुआ स्टोन वर्क भी काफी पसंद किया जा रहा है। ये तमाम डार्क और ब्राइट कलर्स में मौजूद हैं और इनकी कीमत तीन हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये के बीच है।
स्टॉल
गले में डाले जाने वाले स्टॉल में आज भी जामनगर की धूम है। ये कॉटन व सिल्क जैसे फैब्रिक्स में आते हैं और वर्क और फैब्रिक के अनुसार इनकी कीमत पांच सौ रुपये से लेकर तीन हजार रुपयों के बीच रहती है।
शादी का दिन सभी के लिए बेहद अहम होता है। हालांकि, इस दिन के लिए लड़के पहले कंफ्यूजन में रहते थे कि वे क्या पहनें, लेकिन बाजार ने उनकी इस उलझन को दूर कर दिया है और दूल्हों के लिए अब वेस्टर्न और ट्रडिशनल अंदाज में खूब ड्रेसेज उपलब्ध हैं।
शेरवानी का क्रेज
वेडिंग में वियर में सबसे ज्यादा क्रेज फिलहाल शेरवानी का है। ये लगभग हर फैब्रिक और लेटेस्ट डिजाइंस में आपको मिल जाएंगी। सिल्क, जकार्ड, जापानी और इटैलियन फैब्रिक शेरवानियां बेहद पसंद की जा रही हैं। वैसे, शेरवानी की कीमत उस पर हुए वर्क पर डिपेंड करती है। यानी जितना हैवी वर्क होगा, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होगी। शेरवानी पर कुंदन, जरकोजी, स्टोन, मोती व एम्ब्रॉयडरी वर्क खूब चलता है।
शेरवानी पर मशीन से भी एम्ब्रॉयडरी की जाती है, लेकिन डिमांड हैंड वर्क की ज्यादा है। शेरवानी ऑफ वाइट, मरून, ब्लू, गोल्डन, क्रीम, पर्पल जैसे तमाम कलर्स में पसंद की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि इसकी डिमांड विदेश में भी बहुत है। अगर आप डायमंड, गोल्डन या सिल्वर कलर की तार डलवाना चाहते हैं, तो उसका बंदोबस्त भी किया गया है। इनकी कीमत छह हजार रुपये से शुरू होकर एक लाख रुपये तक जाती है।
अंगरखे में शाही दूल्हा
कभी शाही परिवार की पहचान रहा अंगरखा अब दूल्हों की शान बढ़ा रहा है। ये तमाम फैब्रिक्स में बाजार में उपलब्ध हैं। इनकी कीमत इन पर किए गए स्टोन वर्क और एम्ब्रॉयडरी से तय होती है। अंगरखा को धोती और पेंट के साथ भी डाला जा सकता है और ये क्रीम व ऑफ वाइट कलर में ज्यादा पसंद किए जाते हैं। इनकी कीमत चार हजार रुपये से लेकर पचास हजार रुपये तक है।
पुराना नहीं हुआ जोधपुरी का फैशन
जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि यह सूट राजस्थान में खूब चलता है, लेकिन अपने गेटअप के चलते अब ये सूट काफी चलन में है। हालांकि, ये तमाम फैब्रिक्स में आते हैं, लेकिन इनकी डिमांड इटैलियन फैब्रिक में सबसे ज्यादा है। इनकी कीमत इन पर हुए वर्क और फैब्रिक की क्वॉलिटी से होती है। इसकी कीमत करीब तीन हजार रुपये से शुरू होकर करीब 70 हजार रुपये तक है।
मौजूद है ट्रडिशनल ट्रेंड
भले ही क्लोथ मार्किट में तमाम लेटेस्ट डिजाइन आते रहते हों, लेकिन कुर्ता और पजामा आज भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं। फिलहाल, चाइनीज कॉलर और वी कॉलर के कुर्ते पजामे ट्रेंड में हैं। साथ ही, कुर्ते के गले पर हुआ स्टोन वर्क भी काफी पसंद किया जा रहा है। ये तमाम डार्क और ब्राइट कलर्स में मौजूद हैं और इनकी कीमत तीन हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये के बीच है।
स्टॉल
गले में डाले जाने वाले स्टॉल में आज भी जामनगर की धूम है। ये कॉटन व सिल्क जैसे फैब्रिक्स में आते हैं और वर्क और फैब्रिक के अनुसार इनकी कीमत पांच सौ रुपये से लेकर तीन हजार रुपयों के बीच रहती है।
दुल्हिन के सोलह श्र्गार
भारतीय स्त्री के साज-शृंगार को उसके सुहाग का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि ब्याह होते ही महिलाओं की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। गहने न केवल नारी के रूप को बढ़ाते हैं, बल्कि ये हमारी संस्कृति के भी परिचायक हैं
भारतीय नारी का गहनों और सोलह शृंगार से काफी पुराना रिश्ता रहा है। हर युवती के मन में विवाह को लेकर कई अरमान होते हैं। शादी का दिन किसी युवती की जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रही दुलहन को पहनाए जाने वाले गहने और सोलह शृृंगार का हमारी संस्कृति से भी गहरा नाता है। सोलह शृृंगार का एक-एक गहना गहरे अर्थ समेटे हुए है। महिलाओं का शृृंगार कवियों की रचनाओं का भी हिस्सा रहा है। आइए, बात करते हैं विवाहिताओं के साज-शृृंगार और उनसे जुड़ी मान्यताओं की।
ङ्क्षबंदी
बिंदु शब्द से बनी बिंदी को सुहागिन के परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नारियां अपनी दोनों भवों के ठीक बीच ललाट पर लाल बिंदी जरूर लगाती हैं, जिससे उनका चेहरा खिल उठता है।
काजल
आंखों की सुंदरता पर लिखी गई कविताओं की तो गिनती भी संभव नहीं। इनको और सुंदर बना देता है काजल। ऐसा भी माना जाता है कि नवविवाहिता को काजल बुरी नजर से बचाता है।
सिंदूर
स्त्री-पुरुष जब जीवन के सफर में एक होकर चलने का प्रण करते हैं, तो स्त्री को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करते हुए पुरुष पहली बार उसकी मांग में सिंदूर भरता है। यह उसके सुहागिन होने का सबसे बड़ा प्रतीक चिह्नï है।
शादी का जोड़ा
लाल रंग का लहंगा, चोली और ओढऩी में सजी दुलहन मानो आसमान से उतरी परी लगती है। वक्त के साथ-साथ अब शादी के जोड़े की कीमत हजारों से शुरू होकर लाखों रुपये तक पहुंच गई है।
हार
हार बिना शृृंगार कैसा? दुलहन के गले में पड़ा हार उसके सौंदर्य को चरम सीमा तक पहुंचा देता है। वर वधू को मंगलसूत्र के रूप में हार पहनाता है।
चूडिय़ां
चूडिय़ां तो सुहागिनों की विशेष रूप से पहचान कराती हैं। यहां तक कि कई बार चूडिय़ां बदलते समय सुहागिनें साड़ी के पल्लू से अपनी कलाई ढक लेती हैं, क्योंकि विवाहिता की कलाई कभी चूड़ी या कंगन के बगैर नहीं रहनी चाहिए, ऐसी हमारे यहां मान्यता है।
अंगूठी
शादी से पहले सगाई की रस्म तभी पूर्ण मानी जाती है, जब वर-वधू एक-दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं। अंगूठी की महत्ता कितनी है, इसका अंदाजा इससे लग जाता है कि जब भगवान राम ने हनुमान जी को अशोक वाटिका भेजा, तो संदेश के अतिरिक्त अपनी अंगूठी भी साथ भेजी थी।
कमरबंद
कमरबंद में लटक रहे चाबियों के गुच्छे से यह प्रतीत होता है कि इसे पहनने वाली घर की मालकिन है। इससे नारी का आकर्षण और भी बढ़ जाता है।
बिच्छुआ
पैरों में पहने जाने वाले आभूषणों को बिच्छुआ, अंगूठा या फिर आरसी भी कहते हैं। इस आभूषण में मछली, मोर, फूल, तितली इत्यादि की सुंदर आकृतियां बनी रहती हैं।
बाजूबंद
कड़े की तरह का यह नारी आभूषण बांहों में पूरी तरह से कसा रहता है, इसीलिए इसे बाजूबंद कहते हैं। मान्यता है कि नारी का यह आभूषण घर में धन की सुरक्षा करता है।
इयर ङ्क्षरग्स
कान में पहने जाने वाले इस आभूषण को कर्णफूल भी कहते हैं। विवाह के उपरांत नारी के लिए इयर रिंग्स पहनना जरूरी समझा जाता है।
नथ
नारी आभूषणों का एक अभिन्न हिस्सा है नथ। इस आभूषण के बारे में यह भी कहा जाता है कि विवाहिता का नथ जितना अधिक बड़ा और भारी होगा, उसका परिवार भी उतना ही समृद्ध होगा। नथ अधिकतर बाईं ओर पहनी जाती है। सोने की नथ बनाने का काम सबसे अधिक अमृतसर में होता है।
मेहंदी
शादी के समय दुलहन तथा परिवार की सभी सुहागिनें मेहंदी लगाती हैं। मेहंदी हाथों और पैरों में लगाई जाती है। इसके बहुत ही मनमोहक डिजाइन बनाए जाते हैं। माना जाता है कि जिस सुहागिन की मेहंदी का रंग जितना अधिक गाढ़ा होता है, उसका पति उसे उतना ही अधिक प्यार करता है।
गजरा
सुगंधित फूलों से जड़ा गजरा दुलहन या सुहागिनों के बालों के जूड़े का शृृंगार बनता है। यह प्रथा दक्षिण भारत में तो बहुत अधिक प्रचलित है।
मांग टीका
दुलहन के सिर में बालों के ठीक बीच में मांग निकाली जाती है और उस हिस्से का स्वर्ण आभूषण कहलाता है मांग टीका। मांग सीधी और मध्य में होने से अभिप्राय है कि नवविवाहिता सीधा रास्ता अपनाए और बिना पक्षपात के निर्णय ले।
पायल
स्त्री के शृृंगार का यह ऐसा आभूषण है, जो अकसर चांदी से ही बनाया जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सोने को देवी-देवता धारण करते हैं। इसलिए इसे पांव में डालना शुभ नहीं होता। पांव में डाली जाने वाली पायल चांदी की ही बनाई जाती है। इसमें लगे छोटे-छोटे घुंघरुओं की आवाज से नववधू के आने की आहट मिल जाती है। यह आभूषण नवविवाहिता के सौंदर्य में चार चांद लगा देता है।
भारतीय नारी का गहनों और सोलह शृंगार से काफी पुराना रिश्ता रहा है। हर युवती के मन में विवाह को लेकर कई अरमान होते हैं। शादी का दिन किसी युवती की जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रही दुलहन को पहनाए जाने वाले गहने और सोलह शृृंगार का हमारी संस्कृति से भी गहरा नाता है। सोलह शृृंगार का एक-एक गहना गहरे अर्थ समेटे हुए है। महिलाओं का शृृंगार कवियों की रचनाओं का भी हिस्सा रहा है। आइए, बात करते हैं विवाहिताओं के साज-शृृंगार और उनसे जुड़ी मान्यताओं की।
ङ्क्षबंदी
बिंदु शब्द से बनी बिंदी को सुहागिन के परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नारियां अपनी दोनों भवों के ठीक बीच ललाट पर लाल बिंदी जरूर लगाती हैं, जिससे उनका चेहरा खिल उठता है।
काजल
आंखों की सुंदरता पर लिखी गई कविताओं की तो गिनती भी संभव नहीं। इनको और सुंदर बना देता है काजल। ऐसा भी माना जाता है कि नवविवाहिता को काजल बुरी नजर से बचाता है।
सिंदूर
स्त्री-पुरुष जब जीवन के सफर में एक होकर चलने का प्रण करते हैं, तो स्त्री को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करते हुए पुरुष पहली बार उसकी मांग में सिंदूर भरता है। यह उसके सुहागिन होने का सबसे बड़ा प्रतीक चिह्नï है।
शादी का जोड़ा
लाल रंग का लहंगा, चोली और ओढऩी में सजी दुलहन मानो आसमान से उतरी परी लगती है। वक्त के साथ-साथ अब शादी के जोड़े की कीमत हजारों से शुरू होकर लाखों रुपये तक पहुंच गई है।
हार
हार बिना शृृंगार कैसा? दुलहन के गले में पड़ा हार उसके सौंदर्य को चरम सीमा तक पहुंचा देता है। वर वधू को मंगलसूत्र के रूप में हार पहनाता है।
चूडिय़ां
चूडिय़ां तो सुहागिनों की विशेष रूप से पहचान कराती हैं। यहां तक कि कई बार चूडिय़ां बदलते समय सुहागिनें साड़ी के पल्लू से अपनी कलाई ढक लेती हैं, क्योंकि विवाहिता की कलाई कभी चूड़ी या कंगन के बगैर नहीं रहनी चाहिए, ऐसी हमारे यहां मान्यता है।
अंगूठी
शादी से पहले सगाई की रस्म तभी पूर्ण मानी जाती है, जब वर-वधू एक-दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं। अंगूठी की महत्ता कितनी है, इसका अंदाजा इससे लग जाता है कि जब भगवान राम ने हनुमान जी को अशोक वाटिका भेजा, तो संदेश के अतिरिक्त अपनी अंगूठी भी साथ भेजी थी।
कमरबंद
कमरबंद में लटक रहे चाबियों के गुच्छे से यह प्रतीत होता है कि इसे पहनने वाली घर की मालकिन है। इससे नारी का आकर्षण और भी बढ़ जाता है।
बिच्छुआ
पैरों में पहने जाने वाले आभूषणों को बिच्छुआ, अंगूठा या फिर आरसी भी कहते हैं। इस आभूषण में मछली, मोर, फूल, तितली इत्यादि की सुंदर आकृतियां बनी रहती हैं।
बाजूबंद
कड़े की तरह का यह नारी आभूषण बांहों में पूरी तरह से कसा रहता है, इसीलिए इसे बाजूबंद कहते हैं। मान्यता है कि नारी का यह आभूषण घर में धन की सुरक्षा करता है।
इयर ङ्क्षरग्स
कान में पहने जाने वाले इस आभूषण को कर्णफूल भी कहते हैं। विवाह के उपरांत नारी के लिए इयर रिंग्स पहनना जरूरी समझा जाता है।
नथ
नारी आभूषणों का एक अभिन्न हिस्सा है नथ। इस आभूषण के बारे में यह भी कहा जाता है कि विवाहिता का नथ जितना अधिक बड़ा और भारी होगा, उसका परिवार भी उतना ही समृद्ध होगा। नथ अधिकतर बाईं ओर पहनी जाती है। सोने की नथ बनाने का काम सबसे अधिक अमृतसर में होता है।
मेहंदी
शादी के समय दुलहन तथा परिवार की सभी सुहागिनें मेहंदी लगाती हैं। मेहंदी हाथों और पैरों में लगाई जाती है। इसके बहुत ही मनमोहक डिजाइन बनाए जाते हैं। माना जाता है कि जिस सुहागिन की मेहंदी का रंग जितना अधिक गाढ़ा होता है, उसका पति उसे उतना ही अधिक प्यार करता है।
गजरा
सुगंधित फूलों से जड़ा गजरा दुलहन या सुहागिनों के बालों के जूड़े का शृृंगार बनता है। यह प्रथा दक्षिण भारत में तो बहुत अधिक प्रचलित है।
मांग टीका
दुलहन के सिर में बालों के ठीक बीच में मांग निकाली जाती है और उस हिस्से का स्वर्ण आभूषण कहलाता है मांग टीका। मांग सीधी और मध्य में होने से अभिप्राय है कि नवविवाहिता सीधा रास्ता अपनाए और बिना पक्षपात के निर्णय ले।
पायल
स्त्री के शृृंगार का यह ऐसा आभूषण है, जो अकसर चांदी से ही बनाया जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सोने को देवी-देवता धारण करते हैं। इसलिए इसे पांव में डालना शुभ नहीं होता। पांव में डाली जाने वाली पायल चांदी की ही बनाई जाती है। इसमें लगे छोटे-छोटे घुंघरुओं की आवाज से नववधू के आने की आहट मिल जाती है। यह आभूषण नवविवाहिता के सौंदर्य में चार चांद लगा देता है।
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